जय श्री राम
श्री रामचरितमानस की सिद्ध दोहा और चोपाई
“प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन।
जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥”
मैं पवनकुमार श्री हनुमान्जी को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्ट रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्निरूप हैं, जो ज्ञान की घनमूर्ति हैं और जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष-बाण धारण किए श्री रामजी निवास करते हैं॥
इस चौपाई का प्रयोग कब और कहाँ और कैसे करें ----
सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये भूत भगाने के लिये:-
उपर्युक्त दोहा बहुत ही स्वयं सिद्ध है | इसका प्रयोग समझ के करना चाहिए | किसी को बाहरी हवा लग गई हो या भूत प्रेत बाधा हो गई हो तो ये दोहा यह काम आता है | इसके अलावा किसी भयंकर आपत्ति विपत्ति के विनाश के लिए भी ये दोहा रामबाण है |
इस दोहे को बस मन ही मन बोलते रहिये राम जी के ऊपर विस्वास रख के | दोहा खुद व खुद अपना काम प्रारम्भ और आपका प्र्योजन सिद्ध हो जायगा
स्मरण करने योग्य बात :-
जय श्री राम भक्तों आपका प्रभु श्री राम, माता सीता, हनुमान जी, तुलसीदास जी, श्री रामचरितमानस और स्वयं मै पक्का विस्वास होना चाहिए | क्योकि जितना ज्यादा आपका विश्वास होगा उतनी जल्दी आपकी इच्छा होगी | और आपके सारे काम सफल होंगे |
यदि आपकी विपदा या परेशानी समाप्त हो जाती है, राम जी कृपा से, तो आप मंदिर या अपने घर के मंदिर जाके, उनका पूजन करके ,उनको भोग लगाके,उनका आभार जरूर व्यक्त करें और उनको इस समस्या से निकलने के लिए प्रभु को धन्यवाद जरूर दें |
रामायण का महाज्ञानः मुसीबत के समय इन चौपाइयों को परखना चाहिए
रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे।।
नोट - यह प्रयोग आजमाया हुआ है
कृपा करके पूर्ण विस्वास के साथ करके देखें सफलता निश्चित मिलेगी
अपने प्रभु मै विश्वास रखें

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