introduction
अच्छे संस्कार पैदा होने के साथ आते है या देने पड़ते है ? आइये जानते है हम इस प्रेरणादायक कहानी मे जानेंगे कि - "ये कहानी एक घोड़ी और उसके बच्चे की है।" जिसमे वो अपने बच्चे को संस्कार देती है और ये कहानी हमें सिखाती है की इंसान हो या जानवर संस्कार सबके अंदर होते है। आइये जानते है संस्कार ,चरित्र को कैसे महान और शक्तिशाली बनाता है।
राजा और वफ़ादार घोड़ी प्रेरणादायक कहानी
एक राजा के पास सुन्दर घोड़ी थी। कई बार युद्व में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाये और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थी| कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया| बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हष्ट पुष्ट व सुडौल था।
बच्चा बड़ा हुआ। बच्चे ने मां से पूछा- मां मैं बहुत बलवान हूँ, पर काना हूँ.... यह कैसे हो गया| इस पर घोड़ी बोली: "बेटा जब में गर्भवती थी| तू पेट में था तब राजा ने मेरे ऊपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया।
यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला: "मां मैं इसका बदला लूंगा।"
घोड़े ने बदला क्यों नहीं लिया
मां ने कहा "राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है, तू जो स्वस्थ है....सुन्दर है, उसी के पोषण से तो है| यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया तो इसका अर्थ यह नहीं है, कि हम उसे क्षति पहुचाये"| पर उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया, उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की सोच ली।
एक दिन यह मौका घोड़े को मिल गया| राजा उसे युद्व पर ले गया । युद्व लड़ते-लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया, घोड़ा उसे तुरन्त उठाकर वापस महल ले आया।
इस पर घोड़े को ताज्जुब हुआ और मां से पूछा: "मां आज राजा से बदला लेने का अच्छा मौका था, पर युद्व के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही ले पाया, मन ने गवारा नहीं किया....इस पर घोडी हंस कर बोली: बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा है ही नहीं, तू जानकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है।"
"तुझ से नमक हरामी हो नहीं सकती, क्योंकि तेरी नस्ल में तेरी मां का ही तो अंश है।"
माता-पिता के संस्कार बच्चों पर कैसे असर डालते हैं?
यह सत्य है कि जैसे हमारे संस्कार होते है, वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है, हमारे पारिवारिक-संस्कार अवचेतन मस्तिष्क में गहरे बैठ जाते हैं, माता-पिता जिस संस्कार के होते हैं, उनके बच्चे भी उसी संस्कारों को लेकर पैदा होते हैं।
अच्छे संस्कार क्यों जरूरी हैं?
हमारे कर्म ही 'संस्कार' बनते हैं और संस्कार ही प्रारब्धों का रूप लेते हैं! यदि हम कर्मों को सही व बेहतर दिशा दे दें, तो संस्कार अच्छे बनेगें और संस्कार अच्छे बनेंगे तो जो प्रारब्ध का फल बनेगा, वह मीठा व स्वादिष्ट होगा।
Q. संस्कार क्या होते हैं?
A .बढ़ो के द्वारा दी गई अच्छी सीख और सही दिशा ही संस्कार बनते है
Q .अच्छे संस्कार कैसे विकसित करें?
A .अच्छी किताब पढ़कर, अपनी सनातन संस्कृति को जानकार, अच्छे लोगो से मिलकर, माता पिता की आज्ञा मानकर आदि।
Q . क्या बच्चों में संस्कार जन्म से होते हैं?
A . हाँ होते है लेकिन उनको तराशना पड़ता है।
Q . माता-पिता का व्यवहार बच्चों को कैसे प्रभावित करता है?
A . माता पिता की बातों से, उनके अचार - विचार से, उनके पालन पोषण से आदि।
Q .भारतीय संस्कृति में संस्कार का क्या महत्व है?
A . भारतीय संस्कृति संस्कार से ही बनी है दोनों पूरक है।
Q . क्या संस्कार बदले जा सकते हैं?
A . नहीं
निष्कर्ष -
ये काल्पनिक कहानी हमे बताते है कि चाहे इंसान हो या जानवर दोनों के अंदर संस्कार होते है। घोड़े के द्वारा राजा को नहीं मरना हमको सिखाता है कि उसको दिए गए संस्कार ने ही उसको प्रेरणा दी। मन बोल रहा रहा मार दो मौका अच्छा है लेकिन दिल ने उसको को ये करने नहीं दिया। इसलिए कहा भी जाता है कि दिल से सोचो क्योकि दिल हमेशा सुच और सही का साथ देता है उसमे कोई मत भेद या छल कपट नहीं होता।
संस्कार से चरित्र का निर्माण होता है. और चरित्र से बढ़कर दुनिया मे कोई धन दौलत नहीं होती। हमेशा हम सबको अपना चरित्र साफ रखना चाहिए और संस्कारवान बने रहना चाहिए।
- अच्छे संस्कार जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं।
- माता-पिता के संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देते हैं।
- कृतज्ञता और वफादारी महान चरित्र की पहचान हैं।
- क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा सही नहीं होता।
- अच्छे कर्म भविष्य के संस्कार बनते हैं।
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स्रोत
- मनुस्मृति
- महाभारत
- भगवद्गीता
- श्रीमद्भागवत
- रामचरितमानस
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