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| भगवान के दर्शन के बाद कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताना शुभ माना जाता है। |
आपने अक्सर देखा होगा कि पुराने समय के लोग मंदिर में दर्शन करने के बाद तुरंत घर नहीं लौटते थे, बल्कि मंदिर की सीढ़ियों या पैड़ी पर कुछ देर बैठते थे। यह केवल आराम करने की परंपरा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा हुआ है।
दर्शन के बाद बैठने की परंपरा
प्राचीन परंपरा के अनुसार भगवान के दर्शन करने के बाद कुछ समय शांत बैठकर उनके स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। इससे मन को शांति और आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।
प्राचीन श्लोक
मंदिर से बाहर आकर यह प्रार्थना करने की परंपरा बताई गई है—
अनायासेन मरणम्, बिना देन्येन जीवनम्।
देहान्ते तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम्॥
श्लोक का अर्थ
इस प्रार्थना में भगवान से स्वस्थ जीवन, सम्मानजनक जीवन और अंत समय में ईश्वर की कृपा प्राप्त होने की कामना की जाती है।
मंदिर में आँखें बंद क्यों नहीं करनी चाहिए?
जब हम भगवान के दर्शन करने जाते हैं, तब हमें उनके स्वरूप, चरणों और अलौकिक सौंदर्य का दर्शन करना चाहिए। बाहर आकर बैठने के बाद उस स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।
निष्कर्ष
मंदिर में दर्शन के बाद कुछ समय शांत बैठना मन को स्थिर करता है और भगवान के प्रति श्रद्धा को और गहरा बनाता है। यह सनातन परंपरा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पहले थी।
FAQ
प्रश्न: मंदिर में दर्शन के बाद बैठना क्यों चाहिए?
उत्तर: धार्मिक मान्यता के अनुसार दर्शन के बाद कुछ समय शांत बैठकर भगवान का ध्यान करने से मन को शांति और आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।
आधुनिक जीवन में इस शिक्षा का महत्व
आज की तेज़ भागती ज़िंदगी मे किसी को दो पल रुकने की भी फुर्सत नहीं है लेकिन शायद हमारे पूर्वजों को पता था कि मंदिर ही वो जगह है इसमें कुछ देर बैठकर ध्यान करने से मन को शांति मिलेगी और दूसरों के प्रति दया भाव मिलेगा
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