गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए शीघ्र विवाह के लिए श्री रामचरितमानस की सिद्ध दोहा और चोपाई

 

जय श्री राम 

  

  श्री रामचरितमानस की सिद्ध दोहा और चोपाई


तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु, ब्याह साजि सँवारि कै

मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै


विवाह के लिये


अर्थात - 

तब वशिष्ठ की आज्ञा पाकर जनक ने विवाह का सामान सजाकर मांडवी, श्रुतकीर्ति और उर्मिला - इन तीनों राजकुमारियों को बुला लिया। कुशध्वज की बड़ी कन्या मांडवी को, जो गुण, शील, सुख और शोभा की रूप ही थीं, राजा जनक ने प्रेमपूर्वक सब रीतियाँ करके भरत को ब्याह दिया।

ईश्वर के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए। भगवान के नाम का जाप और उनकी पूजा हमारे मनोबल को बढ़ावा देते हैं और हमारे मानसिक और आत्मिक मनोरथों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।


रामायण का महाज्ञानः मुसीबत के समय इन चौपाइयों को परखना चाहिए 

रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे।। 

  इस  चौपाई का प्रयोग कब और कहाँ और कैसे करें ---- 

जय जय श्री राम भक्तों,उपर्युक्त दोहा/चोपाई स्वयं सिद्ध है अपने मनोरथ को पूरा करने मै|यदि कोई शीघ्र विवाह करना चाहता है,किसी के विवाह मे आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए या विवाह की इच्‍छा जल्‍द पूरी होने की हो या कोई भी अपने की विवाह से सम्बन्धी समस्या को ये रामचरितमानस की सिद्ध दोहा और चोपाई निवारण करने मे सक्क्षम है| इसके लिए आपको कुछ खास नहीं करना है| दिन मे जब भी टाइम मिले आप इसका स्मरण करते रहिये ,बोलते रहिये,मन ही मन जाप करते रहिये|कुछ ही दिनों मे आपकी सारी की सारी विवाह सम्बंधित परेशानी खत्म हो जायगी | और शादियों के मंगलगान आपके घर मे गूँजतें सुनाई देंगे |    

स्त्री हो या पुरूष दोनों के ही मन में अपनी विचार धारा के जीवन साथी की चाहत रहती है, यदि जीवनसाथी मनचाहा मिल जाए तो जीवन की अन्य चुनौतियों का सामना करना सरल हो जाता है, और मन चाहे जीवन साथी पाने के लिए हर संभव प्रयास भी किए जाते हैं- श्रीरामचरित्रमानस में एक प्रसंग आता हैं कि- मर्यादापुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के वरण के पूर्व वैदेही जानकी माता सीता ने भी अपने मन चाहे वर की कामना के लिए जगतमाता महागौर के मंदिर में जाकर माता के मंत्र का जप कर विशेष पूजा अर्चना की थी और जगतमाता महागौरी ने प्रसन्न होकर सीता जी को मन चाहे वर प्राप्ति का वरदान दिया था, परिणाम स्वरूप सीता जी को अयोध्या के राजकुमार श्रीराम वर के रूप प्राप्त हुए थे । तब से ही 'श्रीरामचरितमानस' के दोहों और चौपाइयों का मंत्र के रूप में मनवांछित फलों की प्राप्ति के लिए प्रयोग किया जाता रहा है ।

ऐसी मान्‍यता है कि इस ग्रंथ में जो दोहे या चौपाई जिस प्रसंग में लिखे गए हैं, उससे मिलती-जुलती परिस्‍थ‍िति पैदा होने पर उन पंक्‍तियों के ध्‍यान-स्‍मरण या जप से साधकों का कल्‍याण होता है ।

स्मरण करने योग्य बात  


जय श्री राम भक्तों आपका प्रभु श्री राम, माता सीता, हनुमान जी, तुलसीदास जी, श्री रामचरितमानस और स्वयं मै पक्का विस्वास होना चाहिए | क्योकि जितना ज्यादा आपका विश्वास होगा उतनी जल्दी आपकी इच्छा  होगी | और आपके सारे काम सफल होंगे | 
यदि आपकी विपदा या परेशानी समाप्त हो जाती है, राम जी कृपा से, तो आप मंदिर या अपने घर के मंदिर जाके, उनका पूजन करके ,उनको भोग लगाके,उनका आभार जरूर व्यक्त करें और उनको इस समस्या से निकलने के लिए प्रभु को धन्यवाद जरूर दें |

नोट - यह प्रयोग आजमाया हुआ है 

कृपा करके पूर्ण विस्वास के साथ करके देखें

 सफलता निश्चित मिलेगी 

 अपने प्रभु मै विश्वास रखें 

  "जय जय श्री राम" 

     आशा है उपरोक्त लेख आपको पसंद आया हो अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।



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