होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होने वाले 8 दिनों की अवधि को कहते हैं,
जो Holi से पहले आती है।
यह अवधि होलिका दहन से 8 दिन पहले शुरू होती है।
इन 8 दिनों में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते।
फाल्गुन मास की शुक्ला अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है। आमतौर पर होलाष्टक 8 दिनों का होता है, लेकिन कई बार 9 दिनों का हो सकता। इन आठ दिनों में किसी भी शुभ काम को करना पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
होलाष्टक अवधि में किसी भी शुभ काम जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार आदि नहीं करना चाहिए।
1) कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग कर दी थी। इसके कारण वे रुष्ट हो गए और उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया था। इसके उपरांत कामदेव की पत्नी देवी रति ने शिवजी की आराधना की। इसके उपरांत आठ दिनों बाद शिवजी ने उनकी प्रार्थना सुनी और कामदेव को पुनर्जीवन का वरदान दिया।
2) कथा
भक्त प्रहलाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था, लेकिन वो भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। उसके पिता हिरण्यकश्यप को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं थी। इस कारण उसने फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक प्रहलाद को काफी यातनाएं दी थीं। जब उसकी यातनाओं का भी प्रह्लाद पर असर नहीं हुआ तो उसने पूर्णिमा के दिन अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को लेकर अग्निमें बैठने को कहा।
होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। जब होलिका उसे आग में लेकर बैठी तो भी प्रहलाद नहीं जला, लेकिन होलिका जलकर राख हो गई। इस कारण होली से पहले के आठ दिनों को अशुभ माना जाता है और पूर्णिमा के दिन होलिका को जलाया जाता है, जो कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसके उपरांत ही होली का पर्व मनाया जाता है।
होलाष्टक के 8 दिनों में क्या करें?
भगवान विष्णु की पूजा करें
हिंदू मान्यता के अनुसार इन आठ दिनों में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और मंत्र जप करना विशेष फलदायी होता है। जिस प्रकार भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी, उसी प्रकार श्रद्धा से पूजा करने पर वे भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।
लक्ष्मी-नारायण साधना
यदि आर्थिक संकट चल रहा हो तो होलाष्टक के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करें। प्रतिदिन श्रीसूक्त और ऋण मोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
शिव साधना और महामृत्युंजय मंत्र
जो लोग रोग, शत्रु बाधा या मानसिक तनाव से परेशान हैं, वे इन दिनों भगवान शिव की आराधना करें। प्रतिदिन रुद्राष्टकम का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से संकट दूर होते हैं।
श्रीकृष्ण और नृसिंह मंत्र जप
होलाष्टक के दौरान भगवान श्रीकृष्ण या भगवान नृसिंह के मंत्रों का जप करना भी शुभ माना गया है। इन दिनों भगवान श्रीकृष्ण को अबीर-गुलाल अर्पित करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
होलाष्टक के 8 दिनों में क्या न करें?
मांगलिक कार्यों से परहेज
इन आठ दिनों में विवाह, सगाई, तिलक, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं आती हैं।
बाल और नाखून न काटें
होलाष्टक के दौरान बाल या नाखून काटना अशुभ माना गया है। इससे दुर्भाग्य और बाधाएं बढ़ सकती हैं।
वाद-विवाद से बचें
इन दिनों ग्रहों की स्थिति उग्र मानी जाती है, इसलिए झगड़े और विवाद से दूरी बनाए रखें। नकारात्मक लोगों से दूर रहना बेहतर रहेगा।
तामसिक भोजन से परहेज
मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। सात्विक आहार और संयमित जीवनशैली अपनाना शुभ फलदायी होता है।
धार्मिक महत्व
होलाष्टक आत्मशुद्धि, तप, संयम और भक्ति का समय है। यह अवधि व्यक्ति को बाहरी उत्सव से पहले आंतरिक शुद्धि का संदेश देती है। इन आठ दिनों में की गई साधना कई गुना फल देती है।
होलाष्टक के वैज्ञानिक तर्क
होलाष्टक के समय को अशुभ बताने के पीछे बहुत सारे धार्मिक कारण दिए जाते रहे हों, लेकिन इसका मुख्य कारण आपकी सेहत से जुड़ा हुआ है। होली प्रारंभ से पहले वाले सप्ताह में मौसम में काफी बदलाव होना शुरू हो जाता है। इस बदलाव के बीच कभी सर्दी और कभी गर्मी का आना-जाना लगा रहता है। मौसम के इस बदलाव के कारण शरीर की इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है। अतः व्यक्ति के रोगों की चपेट में आने की आशंका भी बढ़ जाती है।
किसी भी शुभ कार्य में काम का बोझ अत्यधिक बढ़ जाता है, अगर ऐसे में व्यक्ति किसी बीमारी की चपेट में आ गया तो वो उन कामों को ठीक से न करने की संभावना बढ़ जाएगी। इस कारण से मौसम बदलाव के इन आठ दिनों को अशुभ बताकर किसी भी शुभ कार्य को वर्जित कर दिया गया है, ताकि लोग स्वस्थ रहें और आने वाले त्योहार को स्वस्थ एवं आनन्दित रहकर माना सकें। होली के बाद मौसम बदल चुका होता है और गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगता है।
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